चुक जाने वाली रात नहीं, झुक जाने वाली रात नहीं
गुडिया की ये सौगात नहीं, गुड्डे की ये बारात नहीं
यह रात नहीं घुंघरू वाली पायल के छम छम बजने की
यह रात नहीं पिय की आहट से ही पल्लू को ढकने की
यह रात नहीं झुमके कजरी तगड़ी व ब्ययरबानी की
यह रात नहीं उघडे वक्षों वस्त्रों व नग्न जवानी की
यह रात मिन्नतों वाली है यह रात रक्त की प्याली है
यह रात चन्द्रमा को ज़द में भर लेने को मतवाली है
यह रात अमावस्या की है यह रात अटल इच्छा की है
यह रात है अमर उजालों की उर के उन्मुक्त ख्यालों की
यह रात रक्त के बीजों को संचित करने की रात है री
यह रात समंदर को जल से वंचित करने की रात है री
यह रात नही मदिरालय की मद में मदमस्त जवानी की
यह रात नहीं सजने धजने यौवन पे यूं इतराने की
यह रात नहीं पूरब पश्चिम के वस्त्रों में खप जाने की
यह रात नहीं चकला बेलन चक्की चूल्हों चौबारों की
यह कैटवाक की रात नहीं, यह किस चुम्बन की रात नहीं
यह रात अधर पे उभरे लफ्जों को चखने की रात नहीं
यह रात चादरों को ताने खर्राटों वाली रात नहीं
यह रात दुर्ग में घुसते मुगलों से लड़ने की रात है री
यह रात वही चित्तौड़ दुर्ग में विप्लव लेती आग है री
यह रात सहस्त्रों माताओं के दिग्दर्शन की रात है री
यह रात आहुति की है री, यह रात भारती की है री
यह रात गुलाबों के काँटों से लड़ने वाली रात है री
यह रात हिमालय के मस्तक पर चढ़ने वाली रात है री
यह रोने वाली रात नहीं यह खोने वाली रात नहीं
यह रात नहीं बच्चे पैदा करते करते चुक जाने की
यह रात नहीं घूंसे थप्पड़ थपकी से ही पिट जाने की
करहाने वाली रात नहीं, ग़म खाने वाली रात नहीं
यह रात श्याम के बंसी के पीछे चलने की रात नहीं
यह रात पति के पदचिन्हों पर चलने वाली रात नहीं
यह रात है इच्छा शक्ति की यह रात मात की भक्ति की
यह रात भित्तियों के राज में मिल जाने वाली रात है री
यह रात उषा के कदमों से आगे चलने की रात है री
यह रात पसीनों की नदिया में कल कल बहती प्यास है री
यह रात तिरंगे को रंगों से तर करने की रात है री
यह रात तिमिर को संकल्पों से ढक देने की रात है री