आखिर क्या था उसमें
जो मुझमें न था??
सुन्दर मैं उससे कहीं ज्यादा हूँ
चपलता और आकर्षण में मेरा कोई सानी नहीं
विद्व्ता, सहनशीलता, और शालीनता, मानो मेरे अंग हैं
ऐसा भी नहीं क़ि मैं रूठती ज्यादा हूँ
लक्ष्मण रेखा भी मैंने पार नहीं की
स्वभाव भी मधुर है
चंचल भी हूँ
हंसमुख हूँ
बेसाख्ता बता
ऐ जालिम, फर्क क्या था ???
जान छिडकनी थी
काश! तुझसे हो पाता
ये तू और मैं का अंतर
हम बन जाता
ए मेरे याचक
ओ मेरे दाता
भाग्य-विधाता
जो मुझमें न था??
सुन्दर मैं उससे कहीं ज्यादा हूँ
चपलता और आकर्षण में मेरा कोई सानी नहीं
विद्व्ता, सहनशीलता, और शालीनता, मानो मेरे अंग हैं
ऐसा भी नहीं क़ि मैं रूठती ज्यादा हूँ
लक्ष्मण रेखा भी मैंने पार नहीं की
स्वभाव भी मधुर है
चंचल भी हूँ
हंसमुख हूँ
बेसाख्ता बता
ऐ जालिम, फर्क क्या था ???
जान छिडकनी थी
काश! तुझसे हो पाता
ये तू और मैं का अंतर
हम बन जाता
ए मेरे याचक
ओ मेरे दाता
भाग्य-विधाता