Monday, March 6, 2017

नहीं

तुझे संवरने को छोड़ा है बिखरने को नहीं
गहने भले उतार दे पर तेवर नहीं

तू बहता दरिया है कोई समंदर नहीं
मीठापन चाहे त्याग दे पर खारापन नहीं

ये मेरा इलाहबाद है तेरा जालंधर नहीं
भूल भले जा तू मुझे पर निरंतर नहीं

हाँ जीत थोड़ी दुष्कर है तू हारना नहीं
दिया भले बुझा दे पर अंधेरापन नहीं