तुझे संवरने को छोड़ा है बिखरने को नहीं
गहने भले उतार दे पर तेवर नहीं
तू बहता दरिया है कोई समंदर नहीं
मीठापन चाहे त्याग दे पर खारापन नहीं
ये मेरा इलाहबाद है तेरा जालंधर नहीं
भूल भले जा तू मुझे पर निरंतर नहीं
हाँ जीत थोड़ी दुष्कर है तू हारना नहीं
दिया भले बुझा दे पर अंधेरापन नहीं
गहने भले उतार दे पर तेवर नहीं
तू बहता दरिया है कोई समंदर नहीं
मीठापन चाहे त्याग दे पर खारापन नहीं
ये मेरा इलाहबाद है तेरा जालंधर नहीं
भूल भले जा तू मुझे पर निरंतर नहीं
हाँ जीत थोड़ी दुष्कर है तू हारना नहीं
दिया भले बुझा दे पर अंधेरापन नहीं