Thursday, January 20, 2022

!! नवागंतुक !!

जब नयनन रात दिनन के फेरन में पड़ना ही भूल गए 

जब पपीहे बरखा-सावन में मनमोदन करना भूल गए 

जब भौंरे कुंज-कानन में रस का आस्वादन ही भूल गए

सब पात झरे

सब जख्म हरे

हर रात मरे

अखियां पनियाँ  

दिल बेमनिया

टुकड़े छोड़े, मन को तोड़े, जब जीना मरना भूल गए। 

तब इस उपवन में तुम आए, मुस्काए थोड़ा हर्षाये ।। 1।।   


जब मधु के प्याले टूट गए संसार सुनहले छूट गए

जब घाटों पर बसने वाले गंगा के तट से रूठ गए

जब सपनों के पक्के बासन कच्चे कांकर से टूट गए

झंकार टूट गी 

साथ छूटा  

सब रस बह गा 

अखियां पनियाँ  

दिल बेमनिया

पायल टूटी, झंकार छुटी, सिंगार सभी अनमना उठे। 

फिर इस मधुबन में तुम छाए, मुस्काए थोड़ा हर्षाये।। २।। 


जब मन के मीत मरे निकले भीतर से कीच भरे निकले

जब बाहर दिल हारे पंछी घर भीतर हारे दिल निकले  

जब पलक रुआंसी हो पुतली से झर-झर नीर भरे निकले 

रणधीर वहीं

रणबीच मरे

निज त्राण हुआ 

अखियां पनियाँ  

दिल बेमनिया

आहट छूटी, परछाई हटी, विश्वास सभी डगमगा उठे। 

फिर इस निधिवन में तुम गाये, मुस्काए थोड़ा हर्षाये।। 3।। 


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