Friday, January 13, 2017

मैं

मैं बिगड़ी हुई चीज हूँ
सुधार ले,
गर साथ रखना है/

मैं आकृति विहीन हूँ
ढाल ले,
गर हाथ चीकना है/

मैं कच्ची शराब हूँ
पका ले,
नहीं तो तेरा मरना है/

मैं निंदियाती रात हूँ
उठा  ले
गर साथ जगना है/

मैं उच्श्रृंखल प्यास हूँ
बुझा ले
गर तृप्त होना  है/

मैं अनंत आकाश हूँ
समा ले
गर तुझमें सपना है/

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