Sunday, January 29, 2017

अभिलाषा

मैं लिख जाऊंगा सरगम के सात सुरों की अभिलाषा
तू जब सुरभित होना चाहे कोई तान छेड़ देना

पक्के रस्तों पे तुझको जब कच्चे जामुन कभी दिखें
ढलते सूरज में तुझको जब शीतलता का पंक दिखे
उड़ते पंछी के पंखों में सपने जब तुझको दीखें
जब दीखे तुझको पतंग में अंतरिक्ष की अभिलाषा
बंद पिंजरे में कोई बुलबुल बस जरा छोड़ देना
मैं लिख जाऊंगा..............................

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