Sunday, January 29, 2017

सांसे तेरे हवाले

अब तो तेरे हैं हवाले
ये जियाले, ये जियाले

जुगनुओं से रात झांके
पर्वतों पे  मोर नाचे
जब से हिलने से लगे हैं
मन के कच्चे-कच्चे धागे
अब तो तेरे हैं ...........

हाथ कंगना बांध रहा है
मन में पपीहा बज रहा है
जब से कटने से लगे हैं
मुझसे मेरे ही परछाए
अब तो तेरे हैं..........

तिलक चन्दन भों पे है अब
मगन दीपक लौ पे है अब
जब से जंचने से लगे हैं
घूंघटों के उसको साये
अब तो तेरे हैं..........

हसरतों के नयन फूंके
शरबतों से अर्क चूसा
दिल के तोड़े उसने ताले
खत पुराने हैं निकाले
अब तो तेरे हैं...........

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