Tuesday, March 20, 2012

भारती के लाल


निडर बनो अजर बनो नई कोई डगर चुनो
मरहम बनो हरम बनो वतन का हमवतन चुनो


समुद्र में रहो अगर समुद्र की लहर चुनो 
धरा पे पग धरो जो तुम तो हिंद सा वतन चुनो
वतन की आन पे जियो तो वन्दे-मात-रम चुनो
वतन की आन पे मरो तो जन-गण-मन चुनो 
निडर बनो .........


नब्ज बनो निराला की कलाम की कलम बनो
करण दधिची एकलव्य भीष्म के परण बनो 
जो बन सको तो तुम बनो रिदम लता रफीक की 
या पृथ्वीराज रासो के तुम आल्हा औ ऊदल बनो 
जो दमदमे का दम भरो तो दम-दमा-दमा-दमम 
या दमदमे में दफ्न हो सुनीता विलियम बनो 
निडर बनो .............


निगाह ना झुके कभी इरादे ना चुकें कभी
किरीट मुकुट हिमालय सा नही यदा झुके कभी 
सदा चलो सधे कदम वसुधा बने कुटुम्बकम 
अदम्य साहसी बनो सुरम्य हो पराक्रमी 
जिजीविषा हो अंक में औ ध्यान में धीरज धरे 
धुरंधरों के तुम धरम दिगम्बरों के तुम दिगम 
उज्जवल शशांक सुन्दरम तन पर कवच-कुंडल धरो 
निडर बनो ...............

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