Wednesday, March 21, 2012

प्यार के उपहार

मेरी मिटटी.....................वो उठा ले गये 
मेरी हस्ती......................वो चुरा ले गये 
मेरे दिल को....................वो दगा दे गये 

गहनों की सुनो गाथा दिल की सुनो विधाता 
पैरों में पड़ी बेडी फिर भी है मांग टेडी 
हाथों में हथकड़ी है फिर भी है बात छेडी
कानों में कील ठोंकी माथे तिलक लहू का 
गल में सजा है फंदा सर मुकुट कंटकों का 
चाबुक पड़े कमर पे इतनी पगार दे गये 
मेरी मिटटी..................................

कोल्हू के बैल बनके पीपे लहू के भरते 
इस बंद कोठरी में ताउम्र हम हैं सड़ते 
छिलके वो नारियल के घिस घिस के हम रगड़ते 
दारू-दवा मिली ना टुकड़ों का हम क्या करते 
वो देख हमको रोते हम देख उनको हँसते 
पाखाना साफ़ करते इतनी पगार दे गये 
मेरी मिटटी................................

चंदा को दिन  में देखा सूरज को वन में देखा 
सागर में देखि ज्वाला शीतल है काल देखा 
एक देशभक्त मैंने नानी गोपाल देखा 
जिसे देख सूर्य जलता ऐसा वो लाल देखा 
कहते तो बहुत देखे करता वो एक देखा 
बेगानी बस्तियों में अनजाने यार दे गये 
मेरी मिटटी...............................

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